सच्चा मिलाप (अभेदता)

A sikh who does not leave the Guru, the Guru never leaves him. He who truly loves the Satguru, Satguru loves him much more. As the sikh falls at the Holy Feet, he has already been accepted, owned and saved by the Satguru.
लकड़ी जब आग में जलती है तो पहले आग का रूप धारण करती है और फिर कोयले में बदल जाती है। कोयला बनी लकड़ी आग से अपनी अलग पहचान बना लेती है। यह लकड़ी के साथ ज़्यादा मिलती है किन्तु जब लकड़ी पूर्ण रूप से आग में जल जाती है तो राख के ढेर के अतिरिक्त कुछ नहीं बचता। वह अपने अलग अस्तित्व को आग में मिटा देती है। वह आग का रूप हो कर आग में ही अदृश्य हो जाती है। उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं रहता, कोई पहचान नहीं रहती। वह पूरी तरह आग में विलीन हो जाती है।

लकड़ी आग में पड़ कर कोयला हो गयी, अपना अस्तित्व गँवा के आग का ही रूप हो गयी, पर अभी विलीन नहीं हुई। कोयले लकड़ी का ही दूसरा रूप है। कोयले राख हो गए, अब लकड़ी विलीन हो गयी।
जब कोई इस प्रकार अपना आप परमात्मा पर न्यौछावर कर दें कि उसकी अपनी कोई अलग पहचान या व्यक्तित्व ना रहे, तब ही वह परमात्मा में पूर्ण रूप से लीन हो सकता है।