सर्वसाँझा अनुभव

बाबा जी संगत में जुड़ने से सभी श्रद्धालुओं की अज्ञानता नष्ट हो जाती थी, शंकाएँ दूर हो जाती थीं। अहं का भंडा फूट जाता था तथा श्रद्धालुओं को दैवी आनंद का अनुभव होता था।

उनकी कृपा-दृष्टि से अमृत-नाम की लालिमा से निरंकारी ज्योति की किरणें निकलती थीं। उनके मुखारविन्द से निकलते शब्द तपते हृदयों पर शान्ति की वर्षा करते थे। बाबा जी के अलौकिक प्रकाश से अंधकार व अज्ञानता दूर हो जाती थी। उनके रोम-रोम से अमृत नाम की ध्वनि गूँजती थी तथा उनकी पवित्रा हजूरी में सभी प्रश्नों व शंकाओं का सरलता से समाधान हो जाता था।