प्रकृति का बाबा जी को प्रणाम करना

एक बार हजूर बाबा हरनाम सिंह जी सीरीवाला गाँव के उत्तर की ओर कुछ दूरी पर वृक्ष के नीचे भक्ति में लीन थे। वह अपना चेहरा ढाँप कर रखते थे। गाँव के कुछ लड़के उनके पास आकर बैठ गए। उन्होंने बाबा जी से अपना चेहरा उघाड़ने की प्रार्थना की तथा उन से चेहरा ढाँपने का कारण भी जानना चाहा। लड़कों की जिद के कारण बाबा जी ने बड़ी नम्रता से कहा कि अभी चेहरा दिखाने का समय नहीं है क्योंकि जहाँ पर भी दृष्टि पड़ेगी वहाँ पर प्रत्येक शुष्क पदार्थ में आग लग जाएगी। बाबा जी के वचनों की सार्थकता को न समझते हुए लड़कों ने बाबा जी के चेहरे से स्वयं ही वस्त्रा उतार दिया। ऐसा करने की देर थी कि सारे गाँव की सूखी व कटी और पकी हुई फ़सल आग में ढेर हो गई। वे लड़के भयभीत हो कर इधर-उधर दौड़े। गाँव वाले भी इस प्रकार अचानक आग लग जाने का कारण नहीं जानते थे। वे इधर-उधर भागने लगे। जब इन गुमराह लड़कों ने यह सारी बात अपने बुजुर्गों को बताई तो वे भाग कर बाबा जी के पास आए। उन्होंने बाबा जी के पवित्रा चरणों में दंडवत् प्रणाम किया और लड़कों की भूल के लिए वे क्षमा-याचना करने लगे। बहुत ही दयाशील हृदय के स्वामी बाबा जी ने आकाश की तरफ़ दृष्टि उठाई। उसी समय आकाश में बिजली चमकने लगी। भयानक आवाज़ व गड़गड़ाहट उत्पन्न हुई तथा मूसलाधार वर्षा शुरू हो गई। अब लोग गाँव की ओर अपने-अपने सामान को सँभालने के लिए दौड़ पड़े। जब आकाश साफ़ हुआ तो गाँव के लोग बाबा जी को धन्यवाद देने के लिए उस स्थान पर पिफर आए, जहाँ पर बाबा जी भक्ति में लीन रहते थे। किन्तु अब वहाँ पर कोई नहीं था, बाबा जी वहाँ से चले गए थे। कई वर्षों के बाद उस गाँव में एक व्यक्ति भुच्चों आया था। उसने बाबा जी को पहचान लिया था। बाबा जी के मुबारक चेहरे से दैवी नूर चमक रहा था। इन्द्र देवता व अग्नि देवता बाबा हरनाम सिंह जी महाराज के चरणों के दास थे। भुच्चों कलाँ के इस महान् संत में इस प्रकार की दिव्य शक्ति मौजूद थी।