परमात्मा के समान लोभ से परे
जिसका तिल भर भी स्वार्थ नहीं
(जिस नो तिलु ना तमाइ)

No sage has appeared in the world to rival Baba Nand Singh Ji Maharaj as a Tyagi of that stature, above greed to the same extent as God.

उस पूर्ण संत के त्याग की उत्कृष्ट भावना मानवीय समझ से दूर है। आज तक इसकी तुलना कोई नहीं कर सका। भविष्य में भी यह भावना प्रकाशमयी बनी रहेगी।

बाबा नंद सिंह जी महाराज का अद्वितीय शानदार जीवन सांसारिक पदार्थों का त्याग है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को श्री गुरु नानक साहिब के जीवन्त रूप में सम्मान देना उनकी पूर्ण निःस्वार्थ भक्ति और सेवा का प्रतीक है। पूर्ण नम्रता, परोपकारी और त्यागभरा उनका जीवन मनुष्यता के लिए पवित्रा संदेश है।

परमात्मा की महिमा का गुणगान इस प्रकार किया जाता है-

फलगुणि नित सलाहीऐ जिस नो तिलु ना तमाइ।।
(उस परमात्मा की स्तुति करो जो सब प्रकार के लोभ-लालच से ऊपर है।)
(उस परमात्मा की स्तुति करो जो सब प्रकार के लोभ-लालच से ऊपर है।)
बाबा नंद सिंह जी महाराज सरीखा त्यागी कोई संत इस संसार में नही हुआ; जो उस परमात्मा की तरह सभी सांसारिक इच्छाओं और प्रलोभनों से मुक्त हो।